श्रद्धालुओं को चाहिए कि जो पौराणिक परम्पराएं हैं, उसी के अनुसार पूजा-अर्चना:- रविन्द्र छिंदा

हिमाचल, 28 अप्रैल (टिंकू पंडित):- अगले महीने यानी के 5 मई को माता चिंतपूर्णी जयंती का पावन दिन आ रहा है। यदि आप भी इस दिन मां चिंतपूर्णी के दरबार में माथा टेकने जा रहे हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। क्योंकि दरबार में जाने से पहले आपको कुछ नियमो का पालन करना पड़ेगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी माता चिंतपूर्णी की जयंती पर भव्य आयोजन किया जाएगा। इसके लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। 4 मई को मंदिर को भव्य रूप से विशेष प्रकार के पुष्पों से सुसज्जित किया जाएगा। पावन पिंडी की विशेष पूजा-अर्चना और हवन यज्ञ भी किया जाएगा। माथा टेकने आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष प्रबंध भी किए जाएंगे। मां चिंतपर्णी को विशेष रूप से तैयार किए गए 56 भोग भी अर्पित किए जाएंगे।
दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुछ नियम रखे गए हैं जिन की पालना करना हर श्रद्धालु को जरूरी है। मां चिंतपूर्णी की जयंती पर किसी भी श्रद्धालु को केक, पेस्ट्री, चॉकलेट व कोल्ड ड्रिंक लाने की अनुमति नहीं होगी। मंदिर प्रशासन ने भी इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं करने की बात कही है। दर्शन पर्ची के समय ही इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि कोई भक्त पेस्ट्री, केक, चॉकलेट या कोल्ड ड्रिंक मंदिर में न लाए। आम तौर पर देखा गया है कि कुछ भक्त श्रद्धास्वरूप केक, चॉकलेट, फ्रूटी और कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजें लेकर भी मंदिर आते हैं और इसे मां को अर्पित करते हैं। जोकि मर्यादा के खिलाफ है।
चिंतपूर्णी मंदिर पुजारी संघ के अध्यक्ष रविन्द्र छिंदा ने कहा कि 5 मई को चिंतपूर्णी माता की जयंती के लिए तैयारियां शुरू की गई हैं। मां के दरबार में केवल हलवा, ड्राई फ्रूट और फल, नारियल, चुनरी आदि ही अर्पित करने चाहिएं। मंदिर अधिकारी बलवंत सिंह पटियाल का कहना हैं कि पुजारियों से इस संबंध में चर्चा की गई है। श्रद्धालुओं को चाहिए कि जो पौराणिक परम्पराएं हैं, उसी के अनुसार पूजा-अर्चना हो। केवल वही चीजें अर्पित की जाएं जिनकी मान्यता है। उन्होंने कहा कि आने वाले श्रद्धालु इस आधुनिक युग में भी पुराणिक मान्यताओं को मानते इन नियमो का पालन करे व सच्ची भावना से माँ के दर्शन करें।।

