किलोमीटर के हिसाब से लगेगा टोल टैक्स
नई दिल्ली, 28 मार्च-(टिंकू पंडित):- विदेशों की तर्ज पर भारत सरकार आहिस्ता-आहिस्ता देश को आधुनिक बना रही है। इसी कड़ी के चलते भारत के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इस कार्य को बहुत तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। आधुनिकता की ओर कदम बढ़ाते हुए 2019 से देशभर के वाहनों में लागू किया गया फास्टैग सिस्टम अब जल्द ही बंद होने वाला है। कुछ समय बाद देशभर में वाहनों से टोल टैक्स की वसूली जीपीएस सिस्टम से होगी। भारत में इसका पायलट प्रोजेक्ट चल भी रहा है। बताया जाता है कि यूरोपीय देशों के इस फॉर्मूले पर केंद्र सरकार काम कर रही है। जीपीएस के जरिये टोल वसूली को सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम कहा जाता है। 2020 में सरकार ने दिल्ली-मुंबई कॉमर्शियल कॉरिडोर में इसका प्रयोग ट्रकों में शुरू किया था। इसके लिए इसरो (ISRO) के नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम की मदद ली गई है। यदि यह प्रोेजेक्ट सफल रहा तो देशभर के सारे टोल प्लाजा खत्म कर दिए जाएंगे और इसी सिस्टम के जरिये वसूली की जाएगी। यह सस्ती भी पड़ेगी और मैनपावर भी नहीं लगेगी।
1.37 लाख गाड़ियों पर हो रहा टेस्ट
केंद्र सरकार ने इस पायलट प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए देशभर में 1.37 लाख गाड़ियों को चिह्नित किया है। इसमें सबसे ज्यादा करीब 36 हजार वाहन महाराष्ट्र के हैं, जबकि मध्यप्रदेश, मणिपुर, सिक्कम और लद्दाख के सिर्फ एक-एक वाहन इस प्रोजेक्ट में शामिल किए गए हैं। इस पायलट प्रोजेक्ट में दिल्ली की 29,705, उत्तराखंड की 14,401, छत्तीसगढ़ की 13,592, हिमाचल की 10,824 और गोवा की 9,112 गाड़ियां शामिल की गई हैं। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो सरकार के साथ-साथ आम लोगों को भी इसका बहुत फायदा होगा एक तो जितने किलोमीटर गाड़ी चलेगी उतना ही टोल टैक्स देना पड़ेगा और दूसरा समय की भी बहुत बचत होगी।

